परिवय
अपने बारे मे कुछ भी कहने को नही है। पहले सोचता था कि बहुत कुछ जानता हूँ। लेकिन यह भ्रम टूट गया। जब अन्तर यात्रा करते करते अपने आप को पहचानने का कुछ एहसास हुआ। अपने आप को जाना। समझ आ गया कि अपने आप को ज्यादा देर तक धोखा नही दे सकूँगा अब।
वैसे मेरा समान्यपरिचय मात्र इतना ही है कि मेरा नाम परमजीत सिहँ है लेकिन मै ब्लोग पर परमजीत बाली नाम से ही लिखता हूँ। आयुर्वेद की कुछ पढाई भी की है।अध्यात्म मे भी काफी रूची है।हिन्दी माध्यम से इंटर्मिडियट तक पढ़ाई की है। स्कूल समय से ही कविता,कहानीयां व लेख आदि लिखता रहा हूँ। जो आज भी जारी है..
वैसे मेरा समान्यपरिचय मात्र इतना ही है कि मेरा नाम परमजीत सिहँ है लेकिन मै ब्लोग पर परमजीत बाली नाम से ही लिखता हूँ। आयुर्वेद की कुछ पढाई भी की है।अध्यात्म मे भी काफी रूची है।हिन्दी माध्यम से इंटर्मिडियट तक पढ़ाई की है। स्कूल समय से ही कविता,कहानीयां व लेख आदि लिखता रहा हूँ। जो आज भी जारी है..
No comments yet.