मेरा परिवय

मत पूछो

 मेरा परिचय

कूछ भी तो नही जानता

अपने को खोजता-खोजता

अपने आप को खो बैठा हूँ

अब जो हूँ वह कोई अपरिचित है

जिसका परिचय शब्दों मे नही बन्धता

भाव उसे समाहित नही कर पाते

कल्पना के घोड़े दोड़ते तो हैं

लेकिन उस तक पहुँच नही पाते

इस लिए अपना परिचय कैसे दूँ?

तुम्हीं कहो ना…

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